महिलाओं के जीवन में पीरियड जिसे मासिक धर्म चक्र (menstrual cycle) भी कहा जाता है, बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी के कारण वे अपनी जीवनशैली से जुड़े कई विशेष निर्णय लेंती है जैसे कि दिनचर्या, खान-पान और एक्सरसाइज को मैनेज करना। मासिक धर्म चक्र को समझकर उसके आधार पर हल्की एक्सरसाइज , अधिक आराम, और आयरन-रिच (पालक, दालें) और विटामिन सी जैसे पौष्ट्क आहार से भरपूर भोजन का सेवन, और इसी में सबसे अहम है अपनी यात्रा, प्रेगनेंसी या दूसरी योजनाएं महिलाएं द्वारा बनाई जाती है। ऐसे में उनका अपने मासिक अवधि (monthly period) को ट्रैक करना, अपने अगले पीरयड्स की डेट का अनुमान, ओव्यूलेशन (ovulation) के दिनों की पहचान, और अपने शरीर के अन्य संकेतों (जैसे मूड, लक्षण) को रिकॉर्ड करना और भी आवश्यक हो जाता है, जिसके लिए उन्हें पीरियड ट्रैकर (period tracker) ऐप जैसे माध्यम की ज़रूरत भी हो सकती है।
ओव्यूलेशन कब होता है? - (When Is Ovulation?)
ओव्यूलेशन महिला के अंडाशय (ovary) से एक परिपक्व अंडा (egg) निकलने की एक प्रक्रिया होती है जो मासिक धर्म चक्र (menstrual cycle) शुरू होने से लगभग 14 दिन पहले होता है (आमतौर पर अगले पीरियड से 12-16 दिन पहले) , लेकिन यह हर महिला और उसके चक्र की लंबाई के आधार पर बदल सकता है। अंडा निकलने के बाद लगभग 12 से 24 घंटे तक ही निषेचित हो सकता है। ओव्यूलेशन का समय निषेशित करने का सबसे उचित समय होता है और गर्भधारण के लिए यह "फर्टाइल विंडो" होती है। इसलिए ओवुलेशन के समय या उससे एक-दो दिन पहले संभोग करने से गर्भधारण की संभावना सबसे अधिक हो जाती है।
गर्भावस्था के लक्षण - Pregnancy Symptoms
यदि आप अपनी फर्टाइल विंडो कैल्कुलेट करने के बाद ही अपने संभोग का समय तय करते है और अधिकतर आप ओव्यूलेशन फेज़ को ही उचित समय मानते है तो आप मुख्य रूप से गर्भधारण करने में सफल हो सकते है। गर्भावस्था के कई लक्षण हैं, जिनमें से सबसे मुख्य लक्षण हैं मासिक धर्म का न आना और मतली (morning sickness) या उल्टी जैसा मन होना। इसी के उपरांत स्तनों में बदलाव (सूजन या दर्द), बार-बार पेशाब का आना, और खाने की इच्छा ना होना भी गर्भावस्था के लक्षण हैं। गर्भावस्था के दौरान अधिकतम महिलाओं को थकान महसूस होती है, और हार्मोनल बदलावों के कारण मूड स्विंगस भी काफी होते है।
हालांकि ये लक्षण आमतौर पर गर्भावस्था के समय ही दिखाई पड़ते है मगर ऐसे कई लक्षण है जो पीरयड्स के पहले व बाद वाले समय में भी होते है। पीरयड्स के पहले और बाद वाले समय में भी होर्मोनल बदलाव के कारण औरतों में कई शारिरिक व भावनात्मक बदलाव देखे जाते है जिसे पीएमएस (PMS) भी कहा जाता है। मासिक धर्म के पहले के सिंड्रोम को प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (Premenstrual Syndrome) और मासिक धर्म के बाद के सिंड्रोम को पोस्टमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (Post Menstrual Syndrome) भी कहा जाता है। प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (Premenstrual Syndrome) और पोस्टमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (Post Menstrual Syndrome) के लक्षण (symptoms) है:
1.प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम
- पेट फूलना
- मासिक धर्म में ऐंठन (period cramps)
- स्तन भारी
- थकान
- मांसपेशियों में दर्द
- मूड स्विंग्स
2. पोस्ट-मेनस्ट्रुअल सिंड्रोम
- पेट दर्द
- योनि में जलन/सूखापन
- संभोग के समय दर्द
- सिरदर्द
- जोड़ों व पीठ में दर्द
पीरियड्स का होना यदि एक आवश्यक प्रक्रिया है तो वहीं उनके देरी से आने पर ये एक चिंता का विषय भी बन जाता है। इसलिए कुछ नुस्खों की मदद से उसे जल्दी लाना भी संभव है।
पीरियड्स लेट क्यों होते हैं? (Periods Late Kyu Hote Hain?)
देरी से पीरियड्स आने के कई कारण संभव है जिनमें से शारीरिक, मानसिक और जीवनशैली से जुड़े कारक शामिल हैं जैसे;
1.हार्मोनल असंतुलन (Hormonal Imbalance): पीसीओएस (PCOS) और थायरॉइड से जुड़ी समस्याएं शरीर में होर्मोनस का संतुलन बिगाड़ सकती हैं, जिससे ओव्यूलेशन की प्रक्रिया भी धीमी हो सकती है। इसलिए डॉक्टर की सलाह से ब्लड टेस्ट करवा कर खून की जांच करवाना आवश्यक है, और साथ ही डाइट में बदलाव व एक्सरसाइज भी इस समस्या के दौरान मदद कर सकता है।
2.स्तनपान: स्तनपान करते समय प्रोलैक्टिन हार्मोन बढ़ जाता है, जो ओव्यूलेशन को रोक सकता है और इस वजह से पीरियड्स देर से आते हैं। डिलीवरी के बाद कई महीनों तक महिलाओं के पीरियड्स ना आने के पीछे ये एक मुख्य कारण है।
3.बर्थ कंट्रोल पिल्स: बर्थ कंट्रोल गोलियों का असर भी हार्मोन पर पड़ता है, जिससे पीरयड्स लेट हो सकते है।
4.तनाव (Stress): अधिक तनाव भी पीर्यड्स के देर से आने की वजह हो सकती है क्योंकिं अधिक तनाव के कीरण शरीर में कोर्टिसोल नाम के होर्मोन का स्तर बढ़ जाता है जो चक्रीय अवधिको प्रभावित करता है। यदि तनाव अधिक लंबे समय तक हो तो यह ओव्यूलेशन की प्रक्रिया को पूरी तरह रोक भी सकता है।
5.खराब लाइफस्टाइल: जंक फूड, शराब-सिगरेट, मोटापा और सही नींद न लेना भी मासिक धर्म की साइकिल को प्रभावित कर सकता है।
पीरियड जल्दी लाने के घरेलू उपाय
यदि किसी भी कारण से आप पीरयड्स को समय से पहले लाना चाहते है या नियमित करना चाहते है तो कुछ घरेलु नुस्खें आपकी इसमें सहायता कर सकते है।
तो पीरयड्स को जल्दी लाने के लिए:
- अदरक का सेवन करें: अदरक को पानी में उबालकर उसमें थोड़ा गुड़ मिलाकर पीने से गर्भाष्य की मासपेशियों में गतिविधि बढ़ती है और शरीर में प्राकृतिक गर्माहट बढ़ती है जिससे पीरयड्स के जल्दी आने की संभावना बढ़ जाती है।
- पपीता खाएं: पपीता में पाए जाने वाले कैरोटीन गर्भाशय में हल्का संकुचन लाकर पीरियड्स को ट्रिगर करता है।
- हल्दी वाला दूध पीएं: हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण हेने के कारण हमें हार्मोन संतुलन में मदद मिलती है।
- गर्म पानी से स्नान करें: हल्के गर्म पानी से नहाना भी शरीर को आराम देता है और पीरियड्स रेगुलर करने में मदद कर सकता है।
- अजवाइन का काढ़ा पीएं: 1 चम्मच अजवाइन को 1 कप पानी में उबालकर दिन में दो बार पीने से गर्भाशय की मांसपेशियों को आराम मिलता है और पीरियड शुरू होने में मदद मिलती है।
- अनानास खाएं: अनानास में मौजूद ब्रोमेलैन नाम का एंजाइम पीरियड्स जल्दी लाने में सहायक होता है
पीरियड्स के लिए व्यायाम – Periods Jaldi Lane ke Liye Exercise
- योग हार्मोन को संतुलित करता है, तनाव कम करता है, और मासिक धर्म चक्र को नियमित रखने में मदद करता है।
निम्न आसनों का अभ्यास लाभकारी है
- भुजंगासन (Cobra Pose)
- सूर्य नमस्कार (Sun Salutation)
- पवनमुक्तासन (Wind-Relieving Pose)
- हल्की वॉक और स्ट्रेचिंग भी फायदेमंद रहती हैं।
- दिन में कम से कम 30-40 मिनट तक हल्का वर्कआउट जैसे कि ब्रिस्क वॉक (तेज़ चलना) से भी पीरयड्स जल्दी आ सकते हैं।
- गर्भाष्य की हल्की मसाज से भी पीरियड्स को जल्दी लाने की संभावना बढ़ाई जा सकती है।
पीरियड क्रैम्प्स में क्या मदद करता है?
पेट या कमर पर हीटिंग पैड या गर्म पानी की बोतल रखने से मासपेशियों को आराम मिलता है और रक्त संचार सुधरता है और लैवेंडर तेल की हल्की मालिश से भी पीरियड क्रैम्प्स (ऐंठन) में आराम मिलता है।
हल्का व्यायाम व योग, और अदरक व हल्दी की चाय का सेवन करने वाले नुस्खें सिर्फ पीरयड्स को जल्दी लाने में ही नहीं, बल्कि पीरयड्स के दौरान हो रहें पीरियड क्रैम्प्स को कम करने में भी बहुत लाभदायक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:
1. 1 महीने से पीरियड नहीं आया तो क्या घरेलू उपाय करें?
पपीता, अदरक, हल्दी वाला दूध, सौंफ का पानी, और दालचीनी जैसे घरेलू उपाय पीरियड को जल्दी लाने में मददगार हो सकते हैं। लेकिन उसके बाद भी यदि पीरियड ना आएं तो गर्भावस्था की संभावना को नज़रअंदाज़ न करें और तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
2.पीरियड्स तुरंत लाने के लिए क्या करना चाहिए?
तुरंत पीरियड लाने के लिए प्राकृतिक उपायों जैसे - योग, गुनगुना पानी, अदरक-दालचीनी की चाय, पपीता और गर्म सेक से ब्लड सर्कुलेशन को सपोर्ट किया जा सकता है, जिससे पीरियड आने में मदद मिलती है। मगर ज्यादा देर बने रहने पर डॉक्टर से सलाह लें।
- गर्म पानी की सिकाई
- नारियल पानी और हल्दी का सेवन
- अदरक वाली चाय में शहद मिलाकर पीना
- तुलसी के पत्तों का सेवन
- योग और व्यायाम
- पानी का अधिक सेवन
3. कच्चा पपीता खाने के कितने समय बाद पीरियड आता है?
कच्चा पपीता खाने के बाद पीरियड्स आने का कोई निश्चित समय नहीं होता है; यह हर महिला के शरीर और हार्मोनल संतुलन पर निर्भर करता है।
4.Normal Period कितने दिन लेट हो सकता है?
आमतौर पर तनाव, यात्रा या खानपान में बदलाव से 5-7 दिन तक पीरियड लेट होना सामान्य माना जाता है।
5. क्या खाने से पीरियड जल्दी आ जाए?
अदरक, हल्दी वाला दूध, अजवाइन, दालचीनी और कच्चा पपीता जैसे गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थ का सेवन करने से पीरियड जल्द से जल्द आने में सहायता मिलती है।
ये सभी नुस्खें काफी हद तक आपके पीरयड्स को समय से पहले लाने में आपकी सहायता कर सकते है, मगर केवल इन्हीं पर निर्भर रहना उचित नहीं है। आपको चिकित्सक की सलाह लेना बहुत आवश्यक है। बार-बार पीरियड लेट होना प्रेग्नेंसी से जुड़ी कठिनाओं को दर्शाता है। ऐसे मामलों में केवल घरेलू उपायों पर पूर्म रूप से निर्भर नहीं रहा जा सकता। समय पर सही जांच और उपचार लेना बहुत ज़रूरी है। Delhi IVF दिल्ली का बेस्ट फर्टिलिटी सेंटर है जहां पर फर्टिलिटी काउंसलरस की अनुभवी टीम प्रेगनेंनसी से जुड़े सभी जटिल समस्याओं का बेस्ट फर्टिलिटी सॉल्यूशन और ट्रीटमेंट ज़रिए निवारण करती है। यदि आप भी प्रेगनेंनसी से जुड़ी किसी भी समस्या का सामना कर रहें है और अनेक नुस्खों, उपचारों और उपाय से कोई लाभ नहीं उठा पा रहें है, तो आज ही हमारी फर्टिलिटी केयर टीम से संपर्क करें - +91-9810600235