यदि आप एक ऐसी महिला है जो जानना चाहती है कि पीरयड्स मिस होने का मतलब आप प्रेंगनेंट है तो आपको ये जानना अधिक आवश्यक है कि पीरयड्स मिस होने पर प्रेगनेंनसी के उपरांत भी कई मुख्य कारण होते है और प्रेगनेंनसी को सफल करने के लिए कई उपाय व स्वस्थ गर्भावस्था healthy pregnancy के सफल होते ही कई ऐसे लक्षण है जो आपको दिखना या महसूस होना आम है। इन सभी बातों का ज्ञान होने से पूर्व आपको मासिक धर्म (periods), मासिक धर्म चक्र के चरण menstrual cycle phases, ओव्यूलेशन ovulation व फर्टाइल विंडो (fertile window) का ज्ञान आवश्यक है। इस आर्टिकल में आपको इन सभी की जानकारी दी गई है।
मासिक चक्र
मासिक चक्र menstrual cycle और चक्रीय अवधि cyclic period हर महिने होने वाली प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है, जो गर्भाशय को गर्भावस्था के लिए तैयार करती है। इसकी औसत अवधि 28 दिन की होती है जिसे मासिक धर्म (periods) के पहले दिन से शुरू होने से अगले पीरियड्स के पहले दिन तक मापा जाता है। मासिक धर्म चक्र अंडे को शुक्राणु के साथ निषेचित करने की प्रक्रिया होती है और यदि अंडा निशेषित होने में असफल हो तो मासिक धर्म (periods) की शुरूआत होती है जिसके दौरान गर्भाशय की परत टूटकर रक्तस्राव के रूप में बाहर निकलती है।
मासिक धर्म चक्र के चरण (Menstrual Cycle Phases)
आमतौर पर 21 से 35 दिन तक का चक्र सामान्य माना जाता है और इसके कई चरण होते है:
- मासिक धर्म (periods) - मासिक धर्म (periods) की शुरूआत के दौरान गर्भाशय की परत टूटकर रक्तस्राव के रूप में बाहर निकलती है और ये लगभग 3-4 दिन के लिए होता है।
- फॉलिक्युलर चरण (Follicular Phase): मासिक धर्म (periods) के पश्चात गर्भाष्य की परत दोबारा मोटी होने लगती है और एक अंडा विकसित होने लगता है जो FSH हार्मोन द्वारा उत्तेजित होता है।
- अंडोत्सर्ग (Ovulation): मासिक धर्म चक्र के 14वें दिन अंडाशय (ovary) से एक अंडा निकलता है जो अंडे को निशेषित होने का सबसे उपजाऊ समय होता है। इस चरण को ओवुलेशन फेज (Ovulation phase) भी कहते है।
- ल्यूटियल चरण (Luteal Phase): यदि अंडा निषेचित नहीं होता, तो गर्भाशय की परत टूटने लगती है, और मासिक धर्म चक्र फिर से शुरू हो जाता है।
फर्टाइल विंडो (Fertile Window) क्या होती है?
ओव्यूलेशन (ovulation) महिला के अंडाशय (ovary) से एक परिपक्व अंडा (egg) निकलने की एक प्रक्रिया होती है जो मासिक धर्म चक्र (menstrual cycle) शुरू होने से लगभग 14 दिन पहले होता है (आमतौर पर अगले पीरियड से 12-16 दिन पहले) , लेकिन यह हर महिला और उसके चक्र की लंबाई के आधार पर बदल सकता है। अंडा निकलने के बाद लगभग 12 से 24 घंटे तक ही फैलोपियन ट्यूब (अंडवाहिनी) में रहकर निषेचित होने का इंतज़ार करता है। ओव्यूलेशन का समय निषेशित करने का सबसे उचित समय होता है और गर्भधारण के लिए यह "फर्टाइल विंडो" होती है। इसलिए ओवुलेशन के समय या उससे एक-दो दिन पहले संभोग करने से गर्भधारण की संभावना सबसे अधिक हो जाती है।
फर्टाइल विंडो (Fertile Window) की पहचान कैसे करें?
1.ओव्यूलेशन कैलकुलेटर और ऐप्स - प्रेगनेंनसी को सफल करने हेतु पीरयड्स और खासतौैर पर ओव्यूलेशन का ट्रैक रखना बहुत मददकार है और यह ओव्यूलेशन कैलकुलेटर और पीरयड ट्रैकर (period tracker) ऐप्स के माथ्यम से संभव हो सकता है। अपनी पिछली पीरियड्स की तारीखों को ट्रैक करके फर्टाइल विंडो का अनुमान लगाना आसान होता है।
2. सर्विकल म्यूकस (Cervical Mucus) में बदलाव: महिलाओं की योनि में असामान्य डिस्चार्ज जो अंडे के सफेद भाग जैसा चिपचिपा और खिंचने वाला होना। (यह इंन्फेक्शन का संकेत हो सकता है।)
3. हल्का पेट दर्द (Mittelschmerz): पेट के निचले हिस्से में हल्का दर्द व ऐंठन होना।
Period ke kitne din baad pregnancy hoti hai – पीरियड्स के कितने दिन बाद प्रेगनेंसी होती है
पीरियड्स के कितने दिन बाद प्रेगनेंसी होती है - यह हर महिला की शारिरिक गतिविधियों पर निर्भर करता है। हर महिला का शरीर अलग होता है, इसलिए fertile days और pregnancy chances भी अलग होते हैं। हालांकि पीरियड्स खत्म होने के तुरंत बाद या उसके 10-2 दिन तक गर्भधारण की संभावना कम होती है तो वहीं पीरियड्स के 7-19 दिन बाद या ओवुलेशन फेज (Ovulation phase) के आसपास गर्भधारण की संभावना सबसे अधिक होती है और प्रेंगनेंनसी के चांसेस (pregnancy chances) भी बढ़ जाते है। पीरियड मिस होने के 6-12 दिन बाद यदि निषेचन सफल हुआ है तो गर्भधारण (pregnancy) के लक्षण भी दिख सकते है। इन सभी संबवनाओं के दौरान यदि पीरयड्स लेट या मिस हो तो ये प्रेगनेंसी के लक्षण को दर्शा सकता है।
गर्भावस्था के लक्षण - Pregnancy Symptoms
यदि आप अपनी फर्टाइल विंडो कैल्कुलेट करने के बाद ही अपने संभोग का समय तय करते है और अधिकतर आप ओव्यूलेशन फेज़ को ही उचित समय मानते है तो आप मुख्य रूप से गर्भधारण करने में सफल हो सकते है। गर्भावस्था के कई लक्षण है जिसमें से सबसे मुख्य लक्षण है मासिक धर्म का न आना और मतली(morning sickness) या उल्टी जैसा मन हेना। इसी के उपरांत स्तनों में बदलाव (सूजन या दर्द), बार-बार पेशाब का आना, और खाने की इच्छा ना होना भी गर्भावस्था के लक्षण हैं। गर्भावस्था के दौरान अधिकतम महिलाओं को थकान महसूस होती है, और हार्मोनल बदलावों के कारण मूड स्विंगस भी काफी होते है।
पीरियड लेट होने पर प्रेग्नेंसी टेस्ट कब करें - late period when to test for pregnancy
पीरियड मिस होने के पहले दिन या उसके कुछ दिन बाद ही प्रेग्नेंसी टेस्ट (pregnancy test) करवाना उचित है क्योंकि इस समय तक शरीर में hCG हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। पीरियड मिस होने के 7 से 14 दिन बाद सुबह के पहले यूरिन से टेस्ट करने से सबसे सटीक परिणाम आने की संभावना होती है। HCG हार्मोन एक प्रेगनेंसी हार्मोन (pregnancy hormone) है जिसकी उपस्थिति से गर्भावस्था का संकेत मिलता है जिसके स्तर की निगरानी के लिए प्रेग्नेंसी ब्लड टेस्ट (pregnancy blood test) होता है जिसके माध्यम से गर्भावस्था की प्रगति (pregnancy weeks to months) का पता चलता है।
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